ऐतिहासिक दिन बैतूल के लिए : ईश्वर ने अपना कार्य पूरा किया, अब हमारी बारी

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enews100 के लिए सुनील व्दिवेदी की रिपोर्ट

17 सितम्बर का आज का दिन बैतूल के लिए ऐतिहासिक रहा..इन्द्रदेवता की कृपा जमकर हुई और बैतूल ने सालों बाद बारिश के औसत के आंकड़े को स्पर्श किया।

1083.9 …एक ऐसा आंकड़ा है जिसका इंतजार सभी को रहता था..विराट कोहली के शतक की तरह..। कोहली के शतक तो बनते रहे लेकिन बारिश को पता नहीं क्या हो जाता था कि वो गायब हो जाती थी।

बीते सालों में यदि बारिश हुई भी तो कुछ दिन बहुत तेज बारिश होती थी और आंकड़े जरूर बढ़ जाता था लेकिन तेज बारिश में गिरा अधिकांश पानी नदी-नालों से बहकर जिले की अंदरूनी जमीन को रीता ही छोड़ जाता था। लेकिन इस साल बारिश अधिकांश समय हल्की-हल्की होती रही। इससे काफी कुछ पानी अंदर तक गया।

यदि इस साल के बारिश के आंकड़े पर गौर किया जाए तो पानी आराम आराम से गिरा। बारिश शुरूआती दौर में थोड़ा कम हुई लेकिन जुलाई के आखिर से जो सिलसिला शुरू हुआ तो फिर लगातार चलता रहा।

आज के आंकड़े पर यदि गौर करें तो मौसम विभाग की ओर से सुबह जो चार्ट जारी किया गया था उसके अनुसार आज सुबह 5 बजे तक जिले की कुल बारिश 1076.7 मिमी हो चुकी थी। आज दिनभर में 7 मिमी बारिश जिलेभर में हो ही चुकी होगी। ऐसे में इस बात की पूरी उम्मीद है कि कल सुबह जब मौसम विभाग के बारिश के आंकड़े जारी होंगे तो जिले में औसत बारिश का आंकड़ा 1083.9 स्पर्श हो चुका होगा।
पिछले साल जब बारिश 616 मिमी पर ही अटक गई थी तब इस साल औसत को छूना सचमुच ईश्वरीय कृपा ही है।

यदि जिले के विकासखंडवार बारिश के आंकड़े पर गौर किया जाए तो इस साल सबसे अधिक बारिश भैंसदेही-चिचोली विकास खंडों में हुई। यहां आंकड़ा 1500 मिमी को स्पर्श कर गया। पट्टन और आठनेर तो इनके आधे के करीब ही हैं। इधर आमला और बैतूल के हजारी होने की उम्मीद है लेकिन औसत के आंकड़े को इनका स्पर्श करना नामुमकिन सा लगता है। इसके अलावा शेष सभी औसत के करीब हैं।

गौरतलब है कि बारिश के अधिकृत आंकड़े 30 सितम्बर तक दर्ज किए जाते हैं। इस हिसाब से दो हफ्ते का समय बाकी है।

अब प्रकृति ने पानी के लिए तरसते लोगों को राहत तो दे दी है लेकिन अब हम सभी का फर्ज भी है कि अमृत की इस बूंद-बूंद को बचाएं और बोरी-बंधान से लेकर पौधारोपण, पानी बचाने के तमाम उपाय करें अन्यथा इस साल पर्याप्त हुई बारिश का अगले वर्ष ठिकाना नहीं..।

1 COMMENT

  1. कहते है कि जब ऊपर वाला देता है तो छप्पर फाड़कर देता है इस वर्ष बारिश भी खूब हुई है अतः सभी का फर्ज है कि रैन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम व अन्य उपायों से जल संरक्षण जरूर करें।

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