Mirco Mueller Jersey  बैतूल से उड़ा था पहला बायोफ्यूल विमान - Enews100

बैतूल से उड़ा था पहला बायोफ्यूल विमान

*बालाजीपुरम संस्थापक सेम वर्मा ने खुद बनाकर उड़ाया था विमान*

*बैतूल*। इन दिनों जहां स्पाइसजेट की बायोफ्यूल उड़ान चर्चा में है और उसे बायोफ्यूल से उड़ने वाला पहला विमान बताया जा रहा है। वहीं बैतूल के अप्रवासी भारतीय सेम वर्मा और उनकी टीम का दावा है कि देश का पहला बायोफ्यूल से उड़ने वाला विमान उन्होंने डेढ़ दशक पहले ही बनाकर उड़ाया था। अब इसको लेकर देश से लेकर विदेश तक सोशल मीडिया में बहस जारी है।

गौरतलब है कि दो दिन पहले 26 अगस्त को स्पाइसजेट ने देहरादून से दिल्ली तक एक विमान उड़ाया। इसमें विमान के एक इंजन के टैंक में सामान्य ईंधन भरा था तो दूसरे टैंक में 20 प्रतिशत बायोफ्यूल से बना ईंधन मिला कर भरा था। स्पाइशजेट की यह आंशिक बायोफ्यूल उड़ान मीडिया की सुर्खियां बनी। प्रधानमंत्री तक ने प्रदूषण को कम करने की इस पहल की सराहना की। लेकिन पहली उड़ान के दावे के बाद विवाद सामने आया।

*वरिष्ठ पत्रकार राजेश बादल ने उठाई आवाज*

लंबे समय तक आज तक चैनल के प्रदेश प्रमुख रहे वरिष्ठ पत्रकार राजेश बादल ने जब बायोफ्यूल की पहली उड़ान के बारे में सुना तो उन्होंने फेसबुक पर एक पोस्ट डाली। इस पोस्ट में उन्होंने लिखा-
” कहा जा रहा है कि भारत का पहला बायो ईंधन से चलने वाला पहला प्लेन उड़ा । अब मैं सोच रहा हूँ कि क़रीब पंद्रह बरस पहले बैतूल के सेम वर्मा ने नागपुर तक बायो ईंधन से चलने वाला प्लेन उड़ाया था । कैमरा टीम के साथ जाकर मैने इसका कवरेज भी किया था ,वह क्या पहला नहीं था ।”

राज्यसभा टीवी के प्रमुख रहे राजेश बादल की यह पोस्ट आते ही सोशल मीडिया पर हंगामा मच गया। जहां काफी लोगों ने उस समय की घटना को याद कर इसकी पुष्टि की। वहीं कईयों ने स्पाइसजेट के इस दावे की हंसी उड़ाई।

*स्पाइसजेट की पहल का स्वागत लेकिन पहली उड़ान हमारी : सेम वर्मा*

इधर इस पूरे घटनाक्रम के केंद्रबिन्दू बने बालाजीपुरम संस्थापक और अप्रवासी भारतीय सेम वर्मा ने कहा कि वे विदेश में थे और जब देश में आए तो उन्हे यह जानकर खुशी हुई कि स्पाइसजेट कंपनी ने अपनी एक उड़ान में बायोफ्यूल का आंशिक मात्रा में उपयोग किया है। श्री वर्मा ने कहा कि विमान ही नहीं बल्कि सभी तरह के वाहनों में बायोफ्यूल का उपयोग आसानी से किया जा सकता है। इससे न सिर्फ प्रदूषण में भारी कमी आएगी बल्कि देश का काफी पैसा बचने से रूपए का मूल्य बढ़ेगा। श्री वर्मा ने पिछले महीनों में बायोफ्यूल पालिसी में केन्द्र सरकार व्दारा किए गए सुधार की भी प्रशंसा कर नए स्टार्टअप कर रहे युवा उद्यमियों से इसका लाभ उठाने की अपील भी की।

उद्योगपति और कुशल पायलट सेम वर्मा ने स्पाइसजेट की पहल का स्वागत जरूर किया लेकिन स्पष्ट कहा कि भारत में पहली बार बायोफ्यूल से विमान उन्होंने उड़ाया। श्री वर्मा ने बताया कि वे 1970 से विमान उड़ा रहे हैं। जब वे विमान से भारत अपने गांव आए तो उन्होंने आम लोगों का क्रेज़ विमान के लिए देखा। इसके बाद एक सस्ता विमान बनाने का संकल्प लिया। करीब 35 लाख की लागत से उन्होंने बैतूल की ही अपने बालाजी हवाईपट्टी के हैंगर में एक चार सीटर विमान बनाया। कम लागत से बने विमान के लिए वे कम लागत का ही ईंधन तलाश रहे थे तभी उन्हें अमेरिका में एक नई तकनीक का पता चला। इसमें जेट्रोफा , गन्ना आदि के माध्यम से फ्यूल तैयार किया जाता है। उसी तकनीक के माध्यम से उन्होंने अपनी टायर फैक्ट्री में ही बायोफ्यूल बनाया। इसे बनाने में तब आबकारी विभाग से अनुमति लेना पड़ती थी। गरूड़ नाम से बने इस छोटे विमान में पिस्टल इंजन था जिसे बायोफ्यूल से चलाना आसान नहीं था लेकिन कई दिनों की मशक्कत के बाद इंजन चलने लगा। करीब 2 सौ लीटर बायोफ्यूल दोनों विंग में भरा गया था।

4 फरवरी 2003 का दिन भारत के विमानन इतिहास के लिए ऐतिहासिक था जब यह विमान उड़ा। देश- विदेश के दर्जनों चैनल और मीडिया की मौजूदगी में एक अमेरिकन टेस्ट पायलट के साथ उन्होंने इस विमान को नागपुर एयरपोर्ट पर उतारा। श्री वर्मा ने कहा कि उनके इस विमान ने बायोफ्यूल की न सिर्फ देश की पहली उड़ान भरी बल्कि उनके विमान में सिर्फ बायोफ्यूल ही था। दूसरी ओर स्पाइसजेट की इस उड़ान में जहां एक टैंक में सामान्य तो दूसरे टैंक में भी मात्र 20 फीसदी बायोफ्यूल था। 78 साल की उम्र में विमान उड़ाने का माद्दा रखने वाले श्री वर्मा कहते हैं कि बैतूल सरीखे जिले में बायोफ्यूल का बहुत स्कोप है। यहां कचरे , रतनजोत , गन्ने आदि से बायोफ्यूल बनाकर किसानों और आदिवासियों की जिंदगी में बदलाव लाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यदि कोई भी युवा इसमें आगे आता है तो वो तकनीक से लेकर आर्थिक सहयोग करने तक के लिए तैयार हैं।

Adam Boqvist Jersey